कैसा रहेगा वर्ष 2010

वर्ष 2009 बीत गया और 2010 हमारे सामने खड़ा है, पिछले सालों की तरह नया साल भी तकनीक के लिहाज से काफी उम्मीदों से भरा हुआ है। पिछले सालों की तरह वर्ष 2010 में भी कई तकनीकें गुमनामी के अंधेरे में खो जाएंगी, वहीं कई तकनीकें भविष्य की दिशा तय करेंगी। इन तकनीकों के दम पर ही कई कंपनियां जहां सफलता के नए पायदान को छुएंगी, वहीं कई कंपनियां तेजी से बदल रहे परिदृश्य में अपनी प्रासंगिकता को बनाए रखने के लिए संघर्ष करती नजर आएंगी।

एक लंबे लेख की पहली कड़ी के रूप में आज हम नए साल में अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में होने वाले परिवर्तनों की चर्चा करेंगे, जिनसे हमने बहुत सी उम्मीदें बांध कर रखी हुई हैं।

1. गूगल क्रोम ओएस : कायदे से न केवल 2009 बल्कि बीता दशक ही यदि पूरी तरह से गूगल के नाम रहा कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। सर्च इंजन के तौर पर इंटरनेट में दस्तक देने वाली इस कंपनी ने वक्त के साथ न केवल तकनीक की नई ऊंचाइयों को छुआ बल्कि अपने आधार को भी और गहरा और विस्तारित किया। गूगल क्रोम ओएस वक्त के साथ गूगल के संस्थापकों में आए आत्मविश्वास का नतीजा है, जिसमें पूरे सूचना प्रौद्योगिकी जगत को बदलने की कल्पना को हकीकत में तब्दील करने का माद्दा है। टर्मिनल की तरह हल्के कामचलाऊ कंप्यूटिंग क्षमता वाले कंप्यूटर पर केवल मूलभूत फाइल और बाकी के काम पूरी तरह से इंटरनेट पर, न हार्डडिस्क के फेल होने का खतरा, न फाइल के करप्ट होने का खतरा और न ही वाइरस की चिंता!

2. गूगल फोन : नए साल के पहले सप्ताह में ही गूगल अपना फोन ‘नेक्सस वन’ के नाम से जारी करने जा रही है, जो गूगल के ही मोबाइल आपरेटिंग सिस्टम एंड्राइड पर चलेगी। दिखने और चलने में बहुत कुछ एप्पल आईफोन की तरह यह फोन भले ही अपने प्रयोक्ताओं को उस तरह का अहसास दिला पाने में नाकामयाब रहे, लेकिन गूगल ने इसकी भरपाई दूसरे तरीके से करने की पूरी योजना बना रखी है, और वह है गूगल वाइस। फिलहाल केवल संयुक्त राज्य अमरीका में व्यापक तौर पर उपलब्ध इस सेवा के महत्व को भारत में वे लोग अच्छी तरह से समझ सकते हैं, जो ‘स्काईपी’ की सुविधा का लाभ उठाते हैं। इसमें बिना किसी आपरेटर (वाई-फाई के सहारे) के आप किसी भी व्यक्ति, समूह या फिर संगठन से जुड़ सकते हैं।

3. आईस्लेट/आईपेड : पहले आईपॉड, फिर आईटच, फिर आईफोन और अब आईस्लेट/आईपेड के माध्यम से एप्पल लोगों को एक नए क्रांतिकारी! उपकरण से परिचय कराने जा रहा है। आईफोन और आईटल के इस विस्तारित संस्करण के लेकर लोगों की जिज्ञासा किस तरह से यह इस बात से समझी जा सकती है कि एप्पल के आईकोनिक सीईओ स्टीव जॉब के आईस्लेट/आईपेड की कार्यप्रणाली से संतुष्ट रहने की खबर ने एप्पल के स्टाक को एक नई ऊंचाई में पहुंचा दिया। फरवरी-मार्च में जारी होने वाले इस उत्पाद में एक तरफ जहां नेटबुक (नोटबुक का हल्का, कम प्रोसेसिंग क्षमता वाला संस्करण) तो दूसरी तरफ ई-बुक के बाजार पर ग्रहण लगा देने की क्षमता है। इसके अलावा आईपॉड की तरह एक नए कंप्यूटिंग सिग्मेंट को जन्म देने की भी क्षमता है।

4. बाडा : गूगल एंड्राइड के माध्यम से एक नया स्वाद चख चुके मोबाइल की दुनिया का दिग्गज खिलाड़ी सैमसंग भी अब अपना खुद का मोबाइल साफ्टवेयर सिस्टम विकसित करने जा रहा है, नाम दिया है बाडा। कोरियाई भाषा में समुद्र के लिए प्रयोग किया जाने वाले यह बाडा गूगल एंड्राइड या फिर एप्पल आईफोन की तरह शक्तिशाली तो नहीं होगा, लेकिन सैमसंग के अधिकारियों का दावा है कि बाडा की बदौलत सस्ते से सस्ते फोन में स्मार्टफोन की सुविधा मुहैय्या कराई जाएगी। कहने का तात्पर्य यह कि बाडा युक्त फोन के लिए साफ्टवेयर विकसित करने के लिए लोगों के पास एक एसडीके उपलब्ध रहेगा, वहीं उसे आम उपभोक्ताओं को बेचने के लिए एक बाजार। और उपभोक्ता के तौर पर आपके पास एक बेहतरीन इंटरफेस युक्त फोन के अलावा मनचाहे साफ्टवेयर को खरीदने की क्षमता।

इन साफ्टवेयर और हार्डवेयर के अलावा और भी बहुत सी चीजें ऐसी हैं, जिन पर हमारी निगाहें लगी रहेंगी। इनमें वाइस, चैटिंग, ई-मेल, सर्च को एक स्थान पर लाने वाले ‘गूगल वेव’ के अलावा गूगल का नया प्रोग्रामिंग लैग्वेज ‘गो’ और पॉल्म का ‘प्री प्लस’, माइक्रोसाफ्ट का तेजी से गुमनामी के अंधेरे में खोता जा रहा मोबाइल आपरेटिंग सिस्टम ‘विनमो’ का सातवां संस्करण, आपेरा का क्रिस्टल इंजन युक्त 10.5 संस्करण शामिल है। सूची तो और भी लंबी हो सकती है, लेकिन उनमें वैसी क्षमता नहीं है, जैसे ऊपर जिक्र की गई चीजों का है। इसके बारे में आप क्या सोचते हैं, इसका जिक्र जरूर करिए।

Posted by raj kumar, 0 Comments